Thursday, 6 April 2017

Self confident ,change my life...

यह मेरा पहला ब्लॉग है , तो मैं आपसे वह पल शेयर करना चाहूंगा जिसने मुझे कुछ बनने के सपने से , कुछ करने के तरफ मोड़ा।
                       जब मैं  छोटा था तो अक्कसर कक्षा मैं मुझे अपने गुरु जी से मार खाना परता था। क्योंकि मैं उनके द्वारा पूछे गए प्रश्नो का जवाब नही दे पाता था।  
                       मार खाने के बाद मुझे बहुत शर्मिंदगी महशूस होती थी , जब मैं  मार खाता था तो उन दोस्तों को देखकर मेरे मन मैं आता की कास मेरा भी दिमाग इनके जैसे तेज  होता तो मैं भी मार  नहीं खाता। 
                      कंही न कंही मेरे दिमाग मै यह बात बैठ गई थी की मैं इनके जैसा नही बन पाउँगा क्योकि मेरा दिमाग कमजोर है। 
                      एक दिन ऐसा हुआ कि मै अकेला कमरे मैं  पढ़ रहा था तभी मैंने सोचा की मैं पढता हूँ फिर भी कुछ याद नहीं रहता , ऐसा क्यों ?
                      यही क्यों शब्द ने मेरे जीवन का सोचने का नजरिया बदल दिया। 
कैसे मैं आप को बतऊँगा ---
Thank you.
   

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